जंगल जासूस 👉
हजूर 👉 कूनो में फिर गूंजी किलकारी👉भारत में जन्मी चीता KGP12 बनी माँ, चार नन्हे शावकों के साथ रचा नया इतिहास
हजूर 👉 मध्य प्रदेश के श्योपुर में फैले कूनो नेशनल पार्क की फिजाओं में इन दिनों एक अलग ही गर्माहट और गजब का रोमांच घुला हुआ है। जंगलों के सन्नाटे को चीरती हुई चार नन्हे चीता शावकों की किलकारियां गुंजायमान हो उठी हैं, जिसने देशभर के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों को झूमने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन ठहरिए, इस पूरी खबर का असली मसालेदार ट्विस्ट सिर्फ इन चार नए मेहमानों की एंट्री में नहीं है, बल्कि उस धाकड़ माँ की पहचान में छुपा है जिसने इन्हें जन्म दिया है। इस बार खुशखबरी देने वाली मादा चीता KGP12 कोई सात समंदर पार अफ्रीका से उड़कर भारत नहीं आई थी, बल्कि वह खुद इसी कूनो की माटी में पैदा हुई हिंदुस्तानी चीता है। कूनो की मशहूर मादा चीता गामिनी की पहली संतान से जन्मी यह भारतीय चीता अब खुद माँ बन चुकी है, यानी कूनो के जंगल में अब चीतों की ‘ग्रैंडमदर’ से लेकर ‘ग्रैंडचाइल्ड’ तक की पूरी देसी खानदानी परंपरा शुरू हो चुकी है।
हजूर 👉 यह नया मोड़ ‘प्रोजेक्ट चीता’ की पूरी पटकथा को किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह दिलचस्प और दमदार बना देता है। याद कीजिए जब 17 सितंबर 2022 को नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका तथा बोत्सवाना से चीतों को उड़नखटोले में बैठाकर कूनो के जंगलों में उतारा गया था। उस वक्त आलोचकों और संशयवादियों के दावों की कोई कमी नहीं थी। तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे कि क्या ये विदेशी मेहमान भारत की गर्मी और मौसम झेल पाएंगे, क्या वे यहाँ के माहौल में ढल पाएंगे या यह पूरा मिशन महज़ एक सरकारी प्रयोग बनकर रह जाएगा। इन चार सालों में कूनो ने खुशियों के साथ-साथ दुखों के भी कई उतार-चढ़ाव देखे। कभी किसी चीते की मौत की खबर ने मायूस किया तो कभी नए शावकों के जन्म ने उम्मीदों को पंख दिए।
हजूर 👉 अब जब प्रोजेक्ट चीता ने अपने चार साल का सफर पूरा कर लिया है, ऐसे में KGP12 का माँ बनना उन तमाम संशयों और आलोचनाओं के मुंह पर एक करारा थप्पड़ बनकर सामने आया है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि विदेशी धरती से आए मेहमानों ने न केवल भारत के जंगलों को अपना असली घर स्वीकार कर लिया है, बल्कि उनकी यहाँ जन्मी अगली पीढ़ी अब इतनी बेफिक्र और मजबूत हो चुकी है कि वह खुद अपना कुनबा बढ़ा रही है। कूनो का सफर अब सिर्फ विदेशों से चीतों को आयात करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत में जन्मे चीतों के यहीं पर माता-पिता बनने की एक सफल पारिवारिक गाथा बन चुका है। वन्यजीव जगत के जानकार इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे, क्योंकि जब कोई विदेशी प्रजाति नए देश में आकर खुद से प्राकृतिक प्रजनन शुरू कर दे, तो समझ लीजिए कि प्रोजेक्ट अब पूरी तरह से सुपरहिट हो चुका है।
हजूर 👉 इस बड़ी खुशखबरी के बाद कूनो का पूरा वन अमला हाई अलर्ट पर है और वहां का माहौल किसी बड़े जश्न से कम नहीं है। वनकर्मियों की स्पेशल टीमें दिन-रात इन नए मेहमानों की सुरक्षा में मुस्तैद हैं। आधुनिक कैमरों और बाइनोक्युलर्स के ज़रिए माँ और चारों शावकों पर दूर से कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि उनकी निजता में रत्ती भर भी इंसानी दखल न हो। शुरुआती कुछ हफ्ते नवजात शावकों के लिए बेहद नाजुक और संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह से कुदरत की पनाह में पनपने का मौका दिया जा रहा है। कूनो के इस ताज़ा और मसालेदार घटनाक्रम ने रफ्तार के इन बाजीगरों के भविष्य पर मुहर लगा दी है। चार साल के लंबे इंतज़ार के बाद आई यह किलकारी आने वाले वक्त में भारत की धरती पर चीतों के एक नए, अटूट और स्वर्णिम साम्राज्य का आगाज़ कर चुकी है।



