हजूर 👉टांडा क्रॉसिंग गेट पर ‘थार’ का हॉर्न और दरोगाओं में हाथापाई, तड़के 4 बजे खाकी के सामने खुली अनुशासन की पोल👉 थाने मे पहुंचा वायरल विवाद?

ख़बर शेयर करें

 

जंगल जासूस 👉

हजूर 👉टांडा क्रॉसिंग गेट पर ‘थार’ का हॉर्न और दरोगाओं में हाथापाई, तड़के 4 बजे खाकी के सामने खुली अनुशासन की पोल👉 थाने मे पहुंचा वायरल विवाद?

हजूर 👉 तराई के जंगलों में 24 अगस्त की सुबह वन्यजीवों की दहाड़ से नहीं, बल्कि वन विभाग के दो दरोगाओं के बीच हुई भीषण तनातनी और ड्रामे से गूंज उठी। मामला तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर की पीपल पड़ाव रेंज के अंतर्गत आने वाले टांडा क्रॉसिंग गेट का है, जहां भोर की पहली किरण फूटने से पहले ही ड्यूटी के अनुशासन की धज्जियां उड़ गईं। जंगल की रखवाली का जिम्मा संभालने वाले दो अफसरों के बीच विवाद ऐसा गहराया कि बात तीखी बहस तक जा पहुंची। देखते ही देखते जंगल का यह मुख्य एंट्री गेट किसी जंग के मैदान में तब्दील हो गया था?

हजूर 👉 घटनाक्रम की शुरुआत सुबह करीब चार से पांच बजे के बीच हुई, जब तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी की जोलासाल रेंज में तैनात वन दरोगा संदीप सूंठा अपनी काले रंग की थार गाड़ी में सवार होकर टांडा क्रॉसिंग गेट पर पहुंचे। सन्नाटे में डूबे जंगल में संदीप सूंठा ने गेट खुलवाने के लिए अपनी थार का हॉर्न जोर-जोर से बजाना शुरू कर दिया। उस समय गेट पर पीपल पड़ाव रेंज में तैनात वन दरोगा बाबूराम वर्मा अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद थे। नियम के मुताबिक रात या भोर के वक्त जंगल के किसी भी गेट से एंट्री करने से पहले वाहन की चेकिंग और रजिस्टर में नाम दर्ज करना अनिवार्य होता है। बाबूराम वर्मा ने भी यही किया और बिना जान-पहचान या एंट्री के सीधे गेट खोलने से इनकार करते हुए पूछताछ शुरू कर दी।

हजूर 👉 बस यही पूछताछ थार सवार दरोगाजी को नागवार गुजरी और वहीं से माहौल गर्मा गया। दरोगा संदीप सूंठा थार से नीचे उतरे और अपने ही महकमे के सहकर्मी बाबूराम वर्मा पर भड़क उठे। बाबूराम वर्मा का कहना था कि यह जंगल का सुरक्षा गेट है, कोई निजी मकान का दरवाजा नहीं कि हॉर्न बजते ही कुंडी खोल दी जाए। इस बात पर दोनों दरोगाओं के बीच जुबानी जंग इतनी तेज हो गई कि जंगल का सन्नाटा तीखी चीख-पुकार और कहासुनी में बदल गया। चश्मदीदों और सूत्रों की मानें तो मामला सिर्फ जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भोर के अंधेरे में दोनों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई और देखते ही देखते नौबत हाथापाई व टॉर्च से मारपीट तक आ पहुंची।

हजूर 👉 सबसे बड़ा सवाल अब संदीप सूंठा की टांडा क्रॉसिंग पर मौजूदगी की मंशा को लेकर खड़ा हो गया है। आखिर जोलासाल रेंज के दरोगा तड़के चार बजे दूसरे प्रभाग के गेट पर क्या कर रहे थे? क्या वे किसी लकड़ी या वन्यजीव तस्करों के गोपनीय इनपुट पर किसी बड़े मिशन के तहत पीछा करते हुए पहुंचे थे, या फिर वे आधिकारिक ड्यूटी या छुट्टी के दौरान बिना किसी पूर्व समन्वय के वहां मौजूद थे? बिना किसी आधिकारिक सूचना के दूसरे प्रभाग की सीमा में एंट्री मांगने की इस हरकत ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं, जिसकी हकीकत अब जांच के घेरे में है।

हजूर 👉 इस पूरे मामले में दरोगा संदीप सूंठा का पिछला रिकॉर्ड भी अब चर्चाओं में आ गया है। जानकारी के मुताबिक संदीप सूंठा कुछ ही महीनों पहले जोलासाल रेंज में तैनात किए गए थे, जहां उनका तबादला गौला रेंज से किया गया था। गौला रेंज में अपनी तैनाती के दौरान भी वे विवादों से अछूते नहीं रहे थे, वहां शांतिपुरी गेट पर एक अन्य वन कर्मचारी के साथ उनके विवाद और कहासुनी का मामला काफी गरमाया था। पुराने विवाद के बाद हुए तबादले के बावजूद ड्यूटी प्वाइंट पर दोबारा ऐसा ही ड्रामा दोहराए जाने से विभागीय अफसर भी सख्ते में हैं कि आखिर यह आदतन अनुशासनहीनता है या फिर महकमे का ढीला रवैया।

हजूर 👉 जंगल के गेट पर हुआ यह हाईवोल्टेज ड्रामा सूरज निकलने से पहले ही थाने की चौखट तक पहुंच गया। वन दरोगा बाबूराम वर्मा ने खुद को पीड़ित बताते हुए ड्यूटी के दौरान सरकारी काम में रुकावट डालने, अभद्रता करने और मारपीट करने के आरोप में संदीप सूंठा के खिलाफ पुलिस में लिखित तहरीर सौंप दी। दूसरी तरफ से संदीप सूंठा की ओर से भी अपने बचाव में आरोप लगाए जाने की बात सामने आ रही है।संदीप सूंठा ने भी बाबूराम वर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए जाने कि चर्चा हैं, लेकिन दो अलग-अलग प्रभागों में तैनात दरोगाओं की इस आपसी भिड़ंत अब सिर्फ दो कर्मचारियों की निजी लड़ाई की नहीं रही, बल्कि महकमे की साख और विभागीय अनुशासन पर बन आई है।

हजूर 👉 अब इस पूरे ड्रामे की परतें खोलने के लिए पुलिस और विभागीय अफसर टांडा क्रॉसिंग गेट के समीप सीसिटीवी और ड्यूटी रजिस्टर को खंगालने की तैयारी में हैं। सुबह चार बजे थार गाड़ी की क्या एंट्री हुई थी, हॉर्न बजने के बाद गेट पर सबसे पहले हाथ किसने उठाया और विवाद का असली ट्रिगर क्या था, इन सारे सवालों के जवाब अब कैमरे की रील और रजिस्टर के पन्नों में तलाशे जा रहे हैं। फिलहाल मामला बेहद गर्म है और पुलिस की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि कानून का डंडा किस दरोगा पर चलता है।

error: Content is protected !!