हजूर 👉 तोता बेरिया रोड पर BDC सदस्य की दबंगई👉वन दरोगा पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश, DFO उमेश तिवारी का करारा प्रहार👉10 घंटे में सलाखों के पीछे पहुँचा आरोपी,?

 

 

जंगल जासूस 👉

हजूर 👉 तोता बेरिया रोड पर BDC सदस्य की दबंगई👉वन दरोगा पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश, DFO उमेश तिवारी का करारा प्रहार👉10 घंटे में सलाखों के पीछे पहुँचा आरोपी,?

हजूर 👉 तराई केंद्रीय के जंगलों में उपखनिज के काले कारोबार और गुंडागर्दी पर नकेल कसने निकली वन विभाग की गश्ती टीम को शायद दूर-दूर तक अंदाज़ा नहीं था कि तोता बेरिया रोड पर उनका सामना कानून को ठेंगा दिखाने वाले एक कथित जनप्रतिनिधि के खौफनाक तेवरों से होने वाला है। 20 सितंबर की तड़के जब पूरा इलाका नींद के आगोश में था, तभी वन सुरक्षा दल ने उपखनिज से ठसाठस भरी एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली को आते देखा। टीम ने बिना वक्त गंवाए गाड़ी रुकवाई और जैसे ही चालक से वैध कागजात की मांग की, माहौल में बारूद सा धमाका हो गया। खुद को क्षेत्र पंचायत सदस्य यानी BDC बताने वाला गुरविंदर सिंह उर्फ टोनी वहां किसी तूफ़ान की तरह आ धमका। आरोप है कि वर्दी का खौफ और कानून का डर ताक पर रखकर उसने सरकारी कर्मियों से सरेआम अभद्रता और गाली-गलौज शुरू कर दी। जब वन दरोगा धन सिंह अधिकारी ने उसकी गीदड़भभकियों को दरकिनार कर कानूनी कार्रवाई जारी रखी, तो आरोपी की बौखलाहट इस हद तक बढ़ गई कि उसने वन दरोगा को रौंदने के इरादे से ट्रैक्टर सीधा उनकी तरफ बढ़ा दिया।

हजूर 👉 सड़क पर अचानक हुए इस जानलेवा हमले से वन टीम के हाथ-पांव फूल गए। अपनी जान पर संकट देख वन दरोगा धन सिंह अधिकारी ने ऐन मौके पर पास के कीचड़ भरे खेत में छलांग लगाकर अपनी जिंदगी बचाई। जिस सड़क पर वन विभाग की टीम सरकारी दस्तावेजों और रॉयल्टी की जांच कर रही थी, वहां एक जनप्रतिनिधि की इस दबंगई ने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया। लेकिन तमाशा यहीं खत्म नहीं हुआ। वन विभाग की टीम जब वहां से निकलने लगी, तो आरोपी के इशारे पर आए बाइक सवारों ने उनकी सरकारी गाड़ी को घेरकर रास्ता रोक लिया और खुली धमकियां दीं। इस पूरे खौफनाक मंज़र के दौरान मुस्तैद कर्मचारियों ने अपने मोबाइल कैमरों में वीडियो रिकॉर्ड कर लिए, जो अब इस गुंडागर्दी का सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत बन चुके हैं। वारदात के समय वन दरोगा के साथ अमर सिंह बिष्ट, हरिचाँद बाला, प्रशांत कुमार और चालक राहुल कनवाल भी मौके पर सीना ताने खड़े थे।

हजूर 👉 जब खाकी और सरकारी मुलाजिमों पर ही आफत आ बनी, तो मामला ठंडे बस्ते में जाने के बजाय सीधे पुलिस की चौखट पर जा पहुंचा। प्रभागीय वनाधिकारी उमेश तिवारी ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दोटूक लहजे में संदेश दिया कि “जंगल की सुरक्षा में मुस्तैद वर्दी पर हाथ डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह खुद को कितना भी बड़ा नेता या रसूखदार क्यों न समझता हो।” DFO के इस आक्रामक तेवर के बाद विभाग की ओर से दर्ज लिखित तहरीर पर केलाखेड़ा थाना पुलिस ने बिना कोई ढील दिए FIR संख्या 0127/2026 ठोक दी। पुलिस ने BNS की संगीन धाराओं 109(1), 126(2), 132, 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की घेराबंदी शुरू कर दी।

हजूर 👉 प्रभागीय वनाधिकारी के कड़े निर्देशों और पुलिस की मुस्तैदी का ही नतीजा रहा कि मुकदमा दर्ज होने के महज 10 घंटे के भीतर ही मुख्य आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ टोनी को सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। पुलिस ने न केवल खाकी का खौफ दिखाया, बल्कि आरोपी की कड़ाई से पूछताछ के बाद वारदात में इस्तेमाल की गई ट्रैक्टर-ट्रॉली संख्या UK06AA-4338 को भी बरामद कर सीज कर दिया। DFO उमेश तिवारी ने साफ किया है कि “10 घंटे में गिरफ्तारी तो सिर्फ शुरुआत है। इस पूरे षड्यंत्र में शामिल एक-एक नामजद, मौके पर बदतमीजी करने वाले बाइक सवारों और पर्दे के पीछे छिपे उनके आकाओं को भी चिन्हित कर जेल भेजा जाएगा।”

हजूर 👉 तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर की इस धुआंधार कार्रवाई से अवैध खनन के पूरे सिंडिकेट में सन्नाटा पसर गया है। जंगल जासूस की नजर में अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या तोता बेरिया रोड पर हुए इस बवाल के पीछे छिपे बाकी आका भी बेनकाब होंगे? DFO के इस तीखे हंटर और पुलिसिया कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तराई के जंगलों में दबंगई और गुंडागर्दी का खेल अब पूरी तरह बंद होगा, और कानून से खिलवाड़ करने वालों का अगला ठिकाना सीधे जेल की सलाखें होंगी।

 

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