जंगल जासूस 👉
हजूर 👉 खनन माफिया को भारी पड़ी गुंडागर्दी👉वन सुरक्षा दल की मुस्तैदी के आगे झुका माफिया, पुलिस ने दर्ज की FIR?
हजूर 👉 तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगलों में खनन माफिया अक्सर अपनी हनक और प्रशासनिक रसूख के बल पर कानून को अपनी जेब में लेकर घूमने की गलतफहमी पाल बैठते हैं। लेकिन इस बार उनका सामना वन विभाग की उस स्पेशल और समर्पित टीम से हो गया, जिसके लिए जंगलों की हिफाजत ही पहली और आखिरी प्राथमिकता है। तोता बेरिया रोड पर जब उपखनिज से लदी एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्राटा भर रही थी, तब गश्त पर निकली वन सुरक्षा दल की टीम ने उसे रोककर जैसे ही वैध दस्तावेज मांगे, खनन माफिया के होश उड़ गए।
हजूर 👉 कागज तो छोड़िए, मौके पर न तो माफिया की कोई दलील काम आई और न ही क्षेत्रीय राजनीति का कोई पैंतरा। जब वन अधिकारियों ने बिना किसी दबाव के नियमानुसार सीज़र की कार्रवाई शुरू की, तो बौखलाहट में आरोपी अपने गुर्गों के साथ मौके पर आ धमका। अपनी दबंगई की हनक दिखाने और कार्रवाई को रोकने के इरादे से उसने वनकर्मियों के साथ जमकर गाली-गलौज की और सरकारी काम में अड़ंगा डाला। बात यहीं खत्म नहीं हुई, वर्दी का खौफ मिटाने के लिए आरोपी ने सीधे वन दरोगा धन सिंह अधिकारी के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश कर डाली। धन सिंह अधिकारी ने गनीमत रही कि अपनी जान बचाने के लिए अंतिम क्षणों में पास के खेत में छलांग लगा दी।
हजूर 👉 इसके बाद माफिया के गुर्गों ने बीच सड़क पर मोटरसाइकिलें आड़ी-तिरछी खड़ी करके वन विभाग की सरकारी गाड़ी का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक कर दिया और खुलेआम जान से मारने की धमकियां देने लगे। उन्हें लगा था कि हर बार की तरह इस बार भी वे अपनी गुंडागर्दी के दम पर वनकर्मियों का मनोबल तोड़ देंगे और मामले को रफा-दफा करवा देंगे। लेकिन वे यह भूल गए थे कि इस बार मैदान में प्रभागीय वनाधिकारी उमेश चंद्र तिवारी की विशेष रूप से चयनित और अभेद्य टीम खड़ी थी।
हजूर 👉 प्रभागीय वनाधिकारी उमेश तिवारी के सख्त मिजाज और कड़े प्रशासनिक रुख के चलते विभाग ने बिना एक पल गंवाए इस दबंगई का करारा जवाब दिया। DFO के कड़े निर्देशों पर वन विभाग ने सीधे कानून का हंटर चलाया और घटना के दौरान बनाए गए एक-एक वीडियो फुटेज को अकाट्य साक्ष्य के रूप में शामिल करते हुए पुलिस थाना केलाखेड़ा में औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज करा दी।
हजूर 👉 परिणाम यह हुआ कि दिन के उजाले में वनकर्मियों पर धौंस जमाने वाले आरोपियों को पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई ने दिन में ही तारे दिखा दिए। केलाखेड़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सबसे कड़ी और गंभीर धाराओं के तहत (FIR No. 0127/2026) मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस FIR में धारा 109(1) यानी हत्या का प्रयास, धारा 132 यानी सरकारी कर्मचारी पर हमला और काम में बाधा डालना, धारा 126(2) यानी गलत तरीके से रास्ता रोकना, तथा धारा 351(2) और 352 यानी आपराधिक धमकी और शांति भंग करने जैसी गैर-जमानती धाराएं शामिल की गई हैं।
हजूर 👉 इस पूरी घटना ने साबित कर दिया है कि वनों और वन्यजीवों की रक्षा में तैनात वन दरोगा धन सिंह अधिकारी, अमर सिंह बिष्ट, वन आरक्षी हरिचाँद बाला, प्रशांत कुमार और वाहन चालक राहुल कनवाल जैसे जांबाज और मुस्तैद कर्मचारियों के हौसले को तोड़ पाना नामुमकिन है। प्रभागीय वनाधिकारी उमेश तिवारी के निर्भीक और दूरदर्शी नेतृत्व में तराई केंद्रीय वन प्रभाग ने माफियाओं को यह संदेश पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो, जंगल के कानून से खिलवाड़ करने वाले का अगला ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की सलाखें होंगी।



