हजूर 👉राजाजी के मखमली मैदानों में बिछा शिकार का नया दांव, जब घास दुरुस्त होगी तभी तो गरजेगा जंगल का राजा!

जंगल जासूस 👉

हजूर 👉राजाजी के मखमली मैदानों में बिछा शिकार का नया दांव, जब घास दुरुस्त होगी तभी तो गरजेगा जंगल का राजा!

हजूर 👉 राजाजी टाइगर रिजर्व का नाम सामने आते ही दिमाग में गरजते बाघ, चिंघाड़ते हाथी और घने रहस्यमयी जंगलों का मंजर तैरने लगता है। लेकिन सच तो यह है कि पूरे जंगल का असली पावर हाउस जमीन पर बिछी वही हरी-भरी घास है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर जमीन पर लजीज और पौष्टिक घास का ढाबा न सजे, तो चीतल, सांभर और हिरण पेट भरने कहां जाएंगे? और जब इन शाकाहारी जानवरों की थाली ही खाली रहेगी, तो जंगल के असली सुल्तान यानी बाघ का शिकार कैसे तय होगा? इसी पूरी फूड चेन में नया दम भरने के लिए अब राजाजी के मैदानों में घास का तगड़ा साइंटिफिक मैनेजमेंट शुरू हो गया है।

हजुर 👉 हाल ही में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से दो दिनों की एक धमाकेदार वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें महाराष्ट्र से आए घास के सबसे बड़े महारथी डॉ. जीडी मुरतकर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने टेबल-कुर्सी वाली थ्योरी से हटकर सीधे फील्ड में उतरकर वन विभाग के अफसरों और जमीन पर पसीना बहाने वाले फील्ड स्टाफ की क्लास ली। असल में जंगलों में सबसे बड़ा विलेन ‘लैंटाना’ जैसी बेमतलब और आक्रामक खरपतवार है, जो तेजी से पैर पसारकर देसी घास का गला घोंट देती है। डॉ. मुरतकर ने समझाया कि इस कचरे को सिर्फ उखाड़कर फेंक देना ही काफी नहीं है, क्योंकि खाली जगह छोड़ते ही यह विलेन फिर से सिर उठा लेता है।

हजूर 👉 असली खेल तो खरपतवार साफ करने के ठीक बाद शुरू होता है, जब खाली हुई जमीन पर वहां की मूल प्रजाति की घास के बीजों को चुन-चुनकर बोना और उनका सही तरीके से छिड़काव करना पड़ता है। इस ट्रेनिंग में सिर्फ बातें नहीं हुईं, बल्कि स्टाफ को हाथ गंदे करके बीजों की पहचान करना, उन्हें संभालना और मिट्टी की सेहत के हिसाब से री-प्लांटेशन करना सिखाया गया। जब जंगल के भीतर ही जानदार और पौष्टिक घास लहलहाएगी, तो शाकाहारी जानवरों को भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा और वे सेहतमंद रहकर अपनी आबादी बढ़ा सकेंगे।

हजूर 👉 इस मिशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजाजी टाइगर रिजर्व की सभी 10 रेंज से लगभग 45 जांबाज फील्ड कर्मचारियों और आला अफसरों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रिजर्व के उपनिदेशक शिरीष ने भी दो टूक कह दिया कि अगर बाघों का साम्राज्य बचाना है, तो सबसे पहले उनके शिकार के खाने का पुख्ता इंतजाम करना ही होगा। अब जब मैदानों में वैज्ञानिक तरीके से मखमली घास का इंतजाम हो रहा है, तो शाकाहारी जीव भी झूमकर चरेंगे और जंगल का पूरा सिस्टम एकदम टकाटक और सुपरहिट चलेगा।

 

Advertisement
Advertisement
❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.