हजूर 👉पहाड़ पर अफसर मस्त, मैदान में पुलिस चुस्त👉बाजपुर में खुला ‘ऑल इज़ वेल’ का सच!👉क्या देहरादून में बैठे हाकिमों तक पहुंच रही फर्जी रिपोर्टिंग?

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जंगल जासूस 👉

हजूर 👉पहाड़ पर अफसर मस्त, मैदान में पुलिस चुस्त👉बाजपुर में खुला ‘ऑल इज़ वेल’ का सच!👉क्या देहरादून में बैठे हाकिमों तक पहुंच रही फर्जी रिपोर्टिंग?

हजूर 👉 पहाड़ के जंगलों की रखवाली का जिम्मा संभाले अफसर देहरादून में बैठे अपने आला हाकिमों को कागजों पर ‘ऑल इज़ वेल’ कह रहे हैं । लेकिन बाजपुर पुलिस की एक ही कार्रवाई ने पहाड़ से लेकर देहरादून तक फैलाए जा रहे इस ‘सब ठीक है’ के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। जब पुलिस ने सुल्तानपुर पट्टी चौकी क्षेत्र के छोई मोड़ पर चेकिंग के दौरान टूरिस्ट बस संख्या UK12-PB-0381 की तलाशी ली, तो अंदर का नजारा देखकर खुद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। सीटों को उखाड़कर, नीचे काली पन्नी बिछाकर ठूंस-ठूंसकर भरे गए 348 कनस्तर लीसा का यह खेल सिर्फ चार तस्करों का कारनामा नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था की गहरी नाकामी को उजागर कर रहा है!

हजूर 👉 सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न वन विभाग के उन “निकाशी गेटों” (चेक पोस्टों) पर खड़ा हो गया है, जो पहाड़ों से मैदान तक की सरहद पर पहरेदारी का दावा करते हैं। अल्मोड़ा और द्वाराहाट के पहाड़ी क्षेत्रों से चलकर मैदान (बाजपुर) तक 10 लाख 50 हजार रुपये की अनुमानित कीमत का अवैध लीसा टूरिस्ट बस में छिपकर पहुंच गया, लेकिन रास्ते में पड़े दर्जनों बैरियर और चेकिंग पॉइंट आखिर क्या कर रहे थे?

हजूर 👉 ज़रा सोचिए, जब चीड़ के पेड़ों से लीसे का अवैध दोहन होता है, तो वह रातों-रात गायब नहीं हो जाता। पहाड़ी ढलानों से उतरकर मुख्य सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों में भरा यह अनमोल लीसा निकाशी गेटों की नजरों से कैसे बच निकला? पहाड़ पर तैनात अमला अगर वास्तव में गश्त कर रहा था और देहरादून रिपोर्ट भेज रहा था कि सब सुरक्षित है, तो फिर 348 कनस्तर लीसा सड़कों पर कैसे दौड़ रहा था? क्या चेकिंग के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है या फिर निकाशी गेटों पर तैनात अमला आंखें मूंदकर लीसे की गाड़ियों को हरी झंडी दे रहा है?

हजूर 👉 स्थिति यह बन चुकी है कि जब-जब सड़क पर खाकी वर्दी वाली पुलिस चेकिंग करती है, अवैध लीसा बरामद होता है👉लेकिन गश्त का दावा करने वाला अमला जब भी मुआयने पर निकलता है, उसे कोई गड़बड़ी दिखाई नहीं देती! बाजपुर पुलिस की चौकसी ने बेनकाब कर दिया है कि पहाड़ में किस तरह लीसा माफिया का राज चल रहा है, जिसे ‘ऑल इज़ वेल’ के पर्दे के पीछे छिपाया जा रहा था।

हजूर 👉 मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए बाजपुर कोतवाली में उप-निरीक्षक सुरेंद्र सिंह बिष्ट की दाखिला फर्द के आधार पर एफआईआर संख्या 309/2026, धारा 26/52 वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मौके से बस चालक मनोज सिंह (पुत्र नंदन सिंह, निवासी विठोरिया, मुखानी, हल्द्वानी), भवान सिंह (पुत्र मोती सिंह, निवासी ग्राम देवली, लमगड़ा, अल्मोड़ा), हेमचंद्र महतोलिया (पुत्र चंद्र बल्लभ महतोलिया, निवासी बिंदुखता, लालकुआं) और पान सिंह (पुत्र दान सिंह, निवासी ग्राम जैती, लमगड़ा, अल्मोड़ा) को रंगे हाथों गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश कर दिया है।

हजूर 👉 पूछताछ में तस्करों ने जो खुलासा किया है, उससे इस पूरे नेक्सस की परतें खुल गई हैं। आरोपियों ने बताया कि यह बरामद अवैध लीसा लमगड़ा (अल्मोड़ा) निवासी मनोज रावत का है, जिसे द्वाराहाट के क्षेत्रों से बस में भरकर लाया गया था। इसे पुलभट्टा टोल प्लाजा के पास स्थित उत्तरांचल टेरपीन प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में पहुंचाया जाना था, जिसके मालिक पप्पू पाठक बताए जा रहे हैं। तस्करों का कहना है कि मनोज रावत और पप्पू पाठक के साथ उनकी पार्टनरशिप थी और माल सुरक्षित पहुंचाने के बाद उन्हें अपना कमीशन मिलना था।

हजूर 👉 बाजपुर पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई की सराहना बनती है कि उप-निरीक्षक सुरेंद्र सिंह, मुख्य आरक्षी जगत सिंह, आरक्षी नवल किशोर, कैलाश काला और रमेश पांडे की टीम ने सड़क पर अपना काम करके इस तस्करी का भंडाफोड़ कर दिया। लेकिन अब असली इम्तिहान जिम्मेदारों का है।
हजूर 👉 जनता की नजर अब इस पूरी कार्रवाई के अंतिम नतीजे पर टिकी है। देखना यह होगा कि क्या देहरादून में बैठे आला हाकिम कागजी ‘ऑल इज़ वेल’ की रिपोर्ट भेजने वाले अपने जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेंगे और उन निकाशी गेटों व मुख्य आकाओं की जवाबदेही तय करेंगे, या फिर अगली बार फिर पुलिस के हाथों अपनी किरकिरी होने का इंतजार करेंगे!

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