जंगल जासूस 👉
हजूर 👉तिरंगा लहराता रहा, खैर की खेप दौड़ती रही! 15 अगस्त की रात जंगल की चौकसी में काशीपुर रेंज ने पिकअप पकड़ा, चालक फरार
हजूर 👉15 अगस्त को पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था। शहरों से लेकर गांवों तक तिरंगा शान से लहरा रहा था, देशभक्ति के तराने गूंज रहे थे। लेकिन इसी जश्न के बीच 15 अगस्त की रात करीब 9 बजे काशीपुर रेंज में जंगल की खैर को कथित तौर पर ठिकाने लगाने की कोशिश ने वन विभाग को चौकन्ना कर दिया। रुद्रपुर हरिद्वार हाईवे के दढ़ियाल मार्ग के पास खैर प्रकाष्ठ लेकर जा रहे पिकअप वाहन संख्या UA05 3835 को गश्त टीम ने पकड़ लिया। कार्रवाई की कमान वन क्षेत्राधिकारी काशीपुर महेश बिष्ट के नेतृत्व में टीम ने संभाली।
हजूर 👉सूचना मिलते ही गश्त टीम ने संदिग्ध पिकअप पर नजर रखी और मौके पर कार्रवाई की। विभागीय जानकारी के मुताबिक वाहन में खैर प्रकाष्ठ का अवैध अभिवहन किया जा रहा था। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत वाहन को कब्जे में ले लिया। यानी रात के अंधेरे में जिस खेप को सड़क पार कर आगे पहुंचाने की तैयारी थी, उसकी रफ्तार वन विभाग ने वहीं रोक दी। पिकअप पकड़ा गया तो चालक ने कानून के सवालों का सामना करने के बजाय मौके से भागने में ही भलाई समझी और अंधेरे में फरार हो गया।
हजूर 👉लेकिन साहब, असली कहानी तो यहीं से शुरू होती है। पिकअप पकड़ा गया, चालक भाग गया, मगर खैर की लकड़ी अब वन विभाग के कब्जे में है। सवाल यह है कि आखिर यह खैर आई कहां से? जंगल की जमीन से निकली तो किस इलाके से? किसने काटी? किसने उठाई? किसने वाहन तक पहुंचाई? और सबसे बड़ा सवाल यह कि इसे आखिर पहुंचाया कहां जाना था? क्योंकि खैर कोई ऐसी चीज नहीं जिसे कोई यूं ही सड़क किनारे से उठाकर पिकअप में भर दे और रातोंरात हाईवे पर दौड़ा दे।
हजूर 👉अब जंगल जासूस का सवाल थोड़ा और सीधा है खैर आसमान से टपकी थी क्या? नेपाल से उड़कर आई थी क्या? या फिर धरती के अंदर से अचानक बाहर निकलकर पिकअप में खुद सवार हो गई? सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर लकड़ी जंगल से निकली है तो उसका स्रोत भी होना चाहिए और अगर उसका परिवहन वैध है तो उसके वैध दस्तावेज भी होने चाहिए। इसलिए अब जांच सिर्फ पिकअप पकड़ने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खैर की लकड़ी का स्रोत, परिवहन का रास्ता, वाहन मालिक, चालक और संभावित गंतव्य तक पूरी कड़ी खंगाली जानी चाहिए।
हजूर 👉वन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी और उप प्रभागीय वनाधिकारी जसपुर के दिशा निर्देशन में अवैध पातन, अवैध खनन और अवैध अभिवहन पर अंकुश लगाने के लिए चल रही गश्त के दौरान की गई। पिकअप को कब्जे में लेने के बाद उसे अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए कार्यशाला परिसर रामनगर में सुरक्षित खड़ा किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। चालक के मौके से फरार होने के बावजूद वाहन का पकड़ा जाना जांच के लिए अहम कड़ी माना जा सकता है। अब देखना यह होगा कि जांच इस वाहन से आगे बढ़कर उस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचती है या नहीं, जिसने कथित तौर पर खैर को जंगल से सड़क तक पहुंचाया।
हजूर 👉15 अगस्त की रात की यह कार्रवाई एक छोटा सा घटनाक्रम जरूर है, लेकिन इसके भीतर कई बड़े सवाल छिपे हैं। देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और वन विभाग के कर्मचारी रात में जंगल की संपदा की रखवाली कर रहे थे। पिकअप पकड़ लिया गया, चालक निकल भागा, मगर खैर की कहानी अभी बाकी है। जंगल जासूस की नजर अब इसी सवाल पर है कि आखिर खैर की इस खेप की जड़ कहां है। अगर लकड़ी जंगल की है तो जंगल का वह हिस्सा कौन सा है जहां से इसे निकाला गया और अगर सब कुछ वैध है तो कागज कहां हैं। पिकअप तो पकड़ लिया गया, अब जरूरत है उस पूरी कहानी को पकड़ने की जो खैर को जंगल से हाईवे तक लेकर आई।

