हजूर 👉कोटद्वार हाईवे पर हाथियों का तांडव, टेंपो ट्रैवलर को बनाया निशाना, ढाई घंटे थमी रही रफ्तार

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जंगल जासूस 👉

हजूर 👉कोटद्वार हाईवे पर हाथियों का तांडव, टेंपो ट्रैवलर को बनाया निशाना, ढाई घंटे थमी रही रफ्तार

हजूर 👉सोमवार सुबह लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज में राष्ट्रीय राजमार्ग 534 पर अचानक हाथियों का बड़ा झुंड पहुंच गया। पीडब्ल्यूडी स्टोर के पास हाथियों की मौजूदगी से हाईवे पर अफरा तफरी मच गई। इसी दौरान सड़क से गुजर रहा एक टेंपो ट्रैवलर झुंड के बीच फंस गया। वाहन में स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाएं सवार थे। हाथियों ने वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। वाहन में रखा मध्याह्न भोजन से जुड़ा सामान और शिक्षकों के लंच टिफिन भी नुकसान की चपेट में आ गए।

हजूर 👉घटना के दौरान सबसे बड़ा खतरा शिक्षकों की जान पर मंडराया। हाथियों के अचानक आक्रामक होने के बाद वाहन में सवार लोगों ने किसी तरह बाहर निकलकर सुरक्षित दूरी बनाई। वाहन के भीतर रखा सामान बिखर गया और पर्स में मौजूद नकदी भी नष्ट होने की बात सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथियों का व्यवहार बेहद आक्रामक था। झुंड ने हाईवे से गुजर रहे कुछ अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद वाहन चालकों ने आगे बढ़ने के बजाय सड़क पर ही रुकना बेहतर समझा।

हजूर 👉सुबह करीब पांच बजे से साढ़े सात बजे तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। हाथियों के सड़क पर मौजूद रहने के कारण दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति ऐसी थी कि चालक हाथियों के करीब जाने का जोखिम नहीं उठा रहे थे। कोटद्वार रेंज के रेंजर विपिन चंद्र जोशी के अनुसार सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। उन्होंने बताया कि कुछ वाहन अनजाने में हाथियों के रास्ते के दोनों ओर खड़े हो गए थे, जिससे झुंड के लिए निकलने की जगह और कम हो गई।

हजूर 👉मामले को गंभीर बनाने वाली एक और वजह नीचे बह रही नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर था। पानी अधिक होने के कारण हाथियों के लिए सुरक्षित दिशा में जाने का विकल्प सीमित हो गया था। रेंजर के मुताबिक झुंड में शिशु हाथी भी शामिल थे। बच्चों की मौजूदगी में हाथियों का अधिक सतर्क और रक्षात्मक होना स्वाभाविक है। हाईवे पर वाहनों की मौजूदगी और सीमित रास्ते के बीच झुंड तनाव में आ गया और इसी दौरान वाहनों पर हमला हुआ।

हजूर 👉वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और हाथियों को सुरक्षित तरीके से हाईवे से हटाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद झुंड को जंगल की ओर ले जाया गया। हाथियों के सड़क से हटने के बाद यातायात दोबारा शुरू हो सका। करीब ढाई घंटे तक चले इस घटनाक्रम ने वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को दहशत में रखा। राहत की बात यह रही कि शिक्षकों समेत किसी व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना सामने नहीं आई।

हजूर 👉कोटद्वार की यह घटना मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते टकराव की गंभीर तस्वीर सामने रखती है। वन क्षेत्र से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथियों की आवाजाही के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है। हाथियों का झुंड दिखाई देने पर वाहन रोककर पर्याप्त दूरी बनाए रखना, रास्ता बंद न करना और उन्हें निकलने का सुरक्षित अवसर देना ही सबसे कारगर सावधानी है। सोमवार की घटना ने साफ कर दिया कि जंगल से सड़क पर आया हाथियों का झुंड केवल यातायात नहीं रोकता, बल्कि कुछ ही क्षणों में पूरा हाईवे जानलेवा क्षेत्र में बदल सकता है।

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