जंगल जासूस👉
हजूर 👉लखनऊ में एसटीएफ का छापा, मुंबई का फिरोज गिरफ्तार; गोरखपुर, लखीमपुर और सीतापुर के जंगलों से बाज पकड़कर खाड़ी देशों में बेचने का कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बेनकाब!
हजूर 👉 वाह रे तस्करी का कारोबार! अब तक आपने सोना, चांदी और हीरे की तस्करी सुनी होगी, लेकिन यहां तो जंगल के बाजों का भी अंतरराष्ट्रीय बाजार सज गया! लखनऊ के मड़ियांव स्थित इरादतनगर में यूपी एसटीएफ ने छापा मारकर सात दुर्लभ बाज बरामद किए और मुंबई निवासी फिरोज मसर्रत खान को गिरफ्तार कर लिया। बरामद पक्षियों की कीमत 14 करोड़ रुपये बताई जा रही है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में 1.40 करोड़ रुपये का आंकड़ा है। सात बाजों की कीमत सुनकर तो लगता है कि तस्करों के लिए अब जंगल में पेड़ नहीं, उड़ते हुए परिंदे भी चलता-फिरता खजाना बन गए!
हजूर 👉 इस कथित कारोबार की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है। पूछताछ में सामने आया कि गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों से दुर्लभ बाज पकड़े जाते थे। फिर मुंबई के रास्ते दुबई, सऊदी अरब और बहरीन तक सप्लाई की जाती थी। मतलब उत्तर प्रदेश के जंगलों में शिकार, मुंबई में कथित नेटवर्क और विदेशों में खरीदार! तस्करी का ऐसा रूट तैयार किया गया कि बाजों को भी शायद पता नहीं होगा कि उनका अगला ठिकाना जंगल नहीं, विदेशी बाजार होने वाला है।
हजूर 👉 अब सवाल यह है कि इस कथित अंतरराष्ट्रीय कारोबार में फिरोज अकेला खिलाड़ी था या पर्दे के पीछे पूरी टीम काम कर रही थी? जंगलों से बाज पकड़ने वाले कौन थे, उन्हें मुंबई तक पहुंचाने वाले कौन थे और विदेशों में सौदा कौन करता था? सात पक्षियों की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों के सामने पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की चुनौती है। एक गिरफ्तारी से कहानी शुरू जरूर हुई है, लेकिन इसके पीछे कितने चेहरे हैं, यह अभी सामने आना बाकी है।
हजूर 👉 इस मामले ने वन विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों से कथित तौर पर दुर्लभ पक्षी पकड़े जा रहे थे और उनका रास्ता विदेशों तक बताया जा रहा है। आखिर जंगलों में सक्रिय इस नेटवर्क की भनक कब और कैसे लगी? कितने समय से यह कारोबार चल रहा था? और क्या इससे पहले भी दुर्लभ पक्षियों की खेप बाहर भेजी जा चुकी है? एसटीएफ के साथ वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की कार्रवाई में सात बाज बरामद हुए हैं और आरोपी के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
हजूर 👉 इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा आकर्षण सात बाज नहीं, बल्कि उनके पीछे बताया जा रहा करोड़ों का कथित विदेशी कारोबार है। जंगल से पक्षी पकड़ने से लेकर मुंबई और फिर दुबई, सऊदी अरब तथा बहरीन तक पहुंचाने की कहानी ने वन्यजीव तस्करी के नए चेहरे को सामने रखा है। अब देखना यह है कि पूछताछ में कौन-कौन से नाम सामने आते हैं। लगता है तस्करों ने बाजों की उड़ान का भी अंतरराष्ट्रीय पैकेज बना रखा था—फर्क सिर्फ इतना था कि टिकट परिंदों का और कमाई तस्करों की होनी थी!



