जंगल जासूस 👉
हजूर 👉 पौड़ी के कंडी गांव में गुलदार का खूनी हमला👉 राहत की ‘चादर’ उतरी, खौफ में इडवालस्यूं!
हजूर 👉 पहाड़ों में शाम ढलते ही अब सिर्फ अंधेरा नहीं उतरता, बल्कि पौड़ी के गांवों में गुलदार का खौफ भी चुपके से दस्तक देने लगता है। इडवालस्यूं क्षेत्र के कंडी गांव में गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे कुछ ऐसा ही सनसनीखेज वाकया हुआ। रोज की तरह गौशाला का काम निपटाकर अपने घर लौट रहीं इंदु देवी भंडारी को शायद गुमान भी नहीं था कि पगडंडी पर घात लगाए बैठा ‘गुलदार’ उनके इंतजार में है। अचानक हुए इस खूनी हमले में महिला का चेहरा जख्मी हो गया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े परिजन और ग्रामीण आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल पौड़ी ले गए, जहां उनका इलाज जारी है। लेकिन साहिब, अस्पताल में इलाज शुरू होते ही गांव के गलियारों में यह तीखा सवाल तैरने लगा कि आखिर गुलदार कब से इस रास्ते पर डेरा जमाए बैठा था?
हजूर 👉 कंडी गांव और आसपास के इलाकों में गुलदार की चहलकदमी कोई नई कहानी नहीं है। पिछले कुछ वक्त से कोई बड़ी वारदात न होने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली ही थी कि इस हमले ने उस राहत की चादर को एक झटके में खींच दिया। गांव के जनप्रतिनिधियों👉जिला पंचायत सदस्य अनुज कुमार और ग्राम प्रधान चवथ शंकर नौटियाल👉का कहना है कि करीब ढाई-तीन महीने के शांत अंतराल के बाद गुलदार ने इंसानी आबादी पर हमला बोला है। अब शाम होते ही ग्रामीणों की चाल तेज हो जाती है, दरवाजों की कुंडी समय से पहले चढ़ने लगी है और बच्चों व मवेशियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की रातों की नींद उड़ गई है।
हजूर 👉 मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग भी तुरंत एक्शन में आया है। डीएफओ पौड़ी महातिम यादव ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है:“घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। प्रभावित क्षेत्र में वन विभाग की विशेष गश्ती टीमों को तुरंत तैनात कर दिया गया है। गुलदार की सटीक मूवमेंट और गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए इलाके में ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। यदि गुलदार की सक्रियता आबादी के आसपास बनी रहती है, तो उच्च अधिकारियों की अनुमति से तत्काल पिंजरा लगाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”
हजूर 👉 डीएफओ पौड़ी का यह आश्वासन और प्रशासनिक मुस्तैदी निश्चित ही राहत देने वाली है, लेकिन कंडी गांव की मांग भी शीशे की तरह साफ है👉कार्रवाई सिर्फ दफ्तरी फाइलों और आश्वासनों तक सीमित न रहे। जिस पगडंडी पर हमला हुआ है, वहां धरातल पर शाम की गश्त बढ़ाई जाए और पिंजरा लगाकर खौफ के इस पर्याय को जल्द से जल्द कैद किया जाए।
सीधी बात 👉 जंगल अपना रास्ता जानता है और गुलदार अपनी चाल! लेकिन पगडंडी पर अगली शाम कितनी महफूज होगी, इसका जवाब वन विभाग के ट्रैप कैमरों, गश्ती टीम की असली मुस्तैदी और गांव में पिंजरा लगाए जाने से ही तय होगा।



