जंगल जासूस👉
हजूर 👉 रामनगर के पूछड़ी में इस बार जेसीबी की चाबी घूमने से पहले ही पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। वन भूमि पर कब्जों को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान अब बड़े प्रशासनिक एक्शन की दहलीज पर है। करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि, लगभग 80 परिवार और तीस से अधिक जेसीबी की तैयारियों ने पूछड़ी को सुर्खियों में ला दिया है। मामला इतना बड़ा है कि वन विभाग के साथ पुलिस, पीएसी और प्रशासनिक अमला भी मैदान में उतरने की तैयारी में है। अब तक वन भूमि पर कब्जों की शिकायतें आती थीं, नोटिस निकलते थे और तारीखें गुजरती थीं, लेकिन इस बार मशीनों की तैयारी ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
हजूर 👉 पूछड़ी में प्रशासन की तैयारियों का नजारा भी कम दिलचस्प नहीं है। पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टरों में बांटने की तैयारी है। छह बैरियर बनाए गए हैं और तीन कंपनी पीएसी के साथ भारी पुलिस बल तैनात करने की व्यवस्था की गई है। तीस से अधिक जेसीबी और कई पोकलैंड मशीनों के साथ 900 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती की चर्चा है। यानी एक तरफ मशीनों की कतार और दूसरी तरफ सुरक्षा का घेरा। रामनगर में इस वन भूमि प्रकरण को लेकर इतनी बड़ी प्रशासनिक तैयारी ने हलचल बढ़ा दी है।
हजूर 👉 तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पुनीत तोमर और उनकी मैदानी टीम के सामने इस बार बड़ी जिम्मेदारी है। पहले चरण में 51 परिवारों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी और अब दूसरे चरण में करीब 80 परिवारों के निर्माणों को कार्रवाई के दायरे में बताया जा रहा है। पूर्व में विभागीय स्तर पर नोटिस और मुनादी की प्रक्रिया का भी उल्लेख हुआ था। हालांकि इस ताजा अभियान पर प्रभागीय वनाधिकारी का कोई नया प्रत्यक्ष बयान प्रमाणित रूप से सामने नहीं आया है। विभागीय तैयारियों के बीच पूछड़ी में अब सबसे ज्यादा चर्चा कार्रवाई के स्वरूप और उसके पैमाने की हो रही है।
हजूर 👉 इस पूरे प्रकरण का सबसे दिलचस्प पहलू उन कथित जमीन के सौदों से जुड़ा है, जिनकी चर्चा समय-समय पर होती रही है। सवाल उठ रहा है कि यदि जमीन वन विभाग की थी तो लोगों को उस पर मालिकाना हक का भरोसा किसने दिलाया? किसने प्लॉट काटे, किसने रकम वसूली और किसने सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर सौदे किए? जिन परिवारों के मकानों पर कार्रवाई की तैयारी है, उन्हें जमीन बेचने वालों की भूमिका भी जांच का विषय है। यदि फर्जी दस्तावेज या अवैध खरीद-फरोख्त हुई है तो उसकी जांच में कई पुराने राज खुल सकते हैं।
हजूर 👉 पूछड़ी की कार्रवाई में अब केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासन की निगाहें लगी हैं। भारी पुलिस बल, पीएसी, वनकर्मी और मशीनरी की व्यवस्था के बीच यह अभियान कितना व्यवस्थित रहता है, इस पर भी सबकी नजर है। करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि का मामला है, इसलिए सीमांकन और अभिलेखों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। एक ओर विभाग की कार्रवाई की तैयारी है तो दूसरी ओर प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस कार्रवाई के साथ कथित जमीन कारोबारियों की भूमिका भी सामने आएगी या कहानी केवल मकानों के ध्वस्तीकरण तक ही सिमटकर रह जाएगी?
हजूर 👉 पूछड़ी में अब तारीख का इंतजार है और निगाहें मशीनों पर। तीस जेसीबी की चर्चा, 900 से ज्यादा कर्मचारियों की तैयारी, 14 सेक्टरों की मोर्चेबंदी और करीब 80 परिवारों का मामला। यह कोई छोटी प्रशासनिक कवायद नहीं है। वन विभाग के लिए यह बड़ी कार्रवाई है और रामनगर के लिए बड़ी खबर। लेकिन पूछड़ी की कहानी में एक सवाल अभी भी सबसे ऊपर है कि सरकारी वन भूमि पर कब्जे हुए कैसे और इन कब्जों के पीछे जमीन के कथित सौदागरों की भूमिका क्या रही? जेसीबी तो सामने दिखाई देगी, मगर पर्दे के पीछे की कहानी कौन खोलेगा? जंगल जासूस की नजर इसी सवाल पर टिकी है।



