जंगल जासूस 👉.
हजूर 👉 वन्यजीव सप्ताह के जश्न के बीच पहाड़ में मातम!👉 बीना देवी की मौत के बाद हाईवे जाम, अब गुलदार की घेराबंदी
हजूर 👉 उत्तराखंड के पहाड़ों में एक तरफ जहां अभी-अभी बड़े तामझाम के साथ ‘राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह’ के जश्न मनाए गए और जंगलों व वन्यजीवों के संरक्षण पर लंबी-लंबी बातें की गईं, वहीं दूसरी तरफ धरातल की खौफनाक सच्चाई ने इन सरकारी उत्सवों के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है और पूरा पहाड़ दहल उठा है।
हजूर 👉 पौड़ी गढ़वाल के तरुली गांव में 48 वर्षीय बीना देवी जब घर के चूल्हे-चौके के लिए जंगल में घास काटने गईं, तो उन्हें क्या पता था कि वह घास उनकी जिंदगी का आखिरी बोझा साबित होगी। झाड़ियों में घात लगाए बैठे खूंखार गुलदार ने पलक झपकते ही महिला को अपने जबड़ों में दबोच लिया और खींचकर ले गया, हालांकि साथ की महिलाओं के शोर मचाने पर वह शव छोड़कर भाग निकला।
हजूर 👉 हादसे के अगले ही दिन पहाड़ का गुस्सा उबल पड़ा और ग्रामीणों ने खंडाह में श्रीनगर-पौड़ी राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आधे घंटे तक चले इस हंगामे ने महकमे के होश उड़ा दिए, जिसके बाद प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) महातिम यादव, एसडीएम नूपुर वर्मा और सीओ तपेश कुमार अपनी पूरी फौज के साथ मौके पर दौड़े-दौड़े पहुंचे।
हजूर 👉 अधिकारियों ने जनता को शांत कराने के लिए उस एक्शन प्लान का पिटारा खोला जो हमेशा हर लाश गिरने के बाद ही खुलता है। डीएफओ महातिम यादव के नेतृत्व में महकमे ने जंगल को छावनी बना दिया है👉दो विशेष गश्ती टीमें, छह आधुनिक ट्रैप कैमरे, दो भारी-भरकम पिंजरे और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के आदेश पर दो पक्के शिकारियों को मैदान में उतार दिया गया है, जिसमें पहले पकड़ने या बेहोश करने और बात न बनने पर अंतिम विकल्प के तौर पर कार्रवाई करने का फरमान जारी है।
हजूर 👉 वन्यजीव सप्ताह के चमकते बैनरों और पोस्टरों के बीच यह सवाल अब पहाड़ की हर घाटी में गूंज रहा है कि आखिर कब तक इंसानी जिंदगियों की कीमत पर इन मूक जानवरों के संरक्षण का दौर चलता रहेगा। हाइवे का जाम तो पुलिस-प्रशासन ने आधे घंटे की मनुहार से खोल दिया और गाड़ियां फिर से फर्राटा भरने लगीं, लेकिन पहाड़ के लोगों के सीने पर जो डर का स्थायी जाम लगा है, उसका हिसाब कौन देगा जब तक जमीन पर कोई ठोस और सुरक्षित नतीजा नहीं निकलता।



