जंगल जासूस 👉
हजूर 👉उत्तराखंड के जंगलों का सीना चीरकर यूपी के स्वार में चल रहा था अवैध लकड़ी का काला खेल, वन विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक से तस्करों में मचा हड़कंप?
हजूर 👉 उत्तराखंड के जंगलों की बहुमूल्य लकड़ी को किस प्रकार उत्तर प्रदेश की सीमाओं के भीतर संचालित अवैध टालों तक पहुंचाया जा रहा है, इसका एक जीता-जागता और सनसनीखेज प्रमाण तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टीम द्वारा उत्तर प्रदेश के स्वार क्षेत्र में की गई अचानक छापेमारी से सामने आया है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किस प्रकार कागजी दावों और सीमाओं की आड़ में तस्कर बेखौफ होकर जंगलों को चीर रहे हैं और सरकारी संपदा को चूना लगा रहे हैं।
हजूर 👉 मामले की शुरुआत तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर के अंतर्गत हुई जहां लंबे समय से यह सूचना मिल रही थी कि उत्तराखंड के जंगलों से कटने वाली कीमती लकड़ी को रातों-रात उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अंतर्गत आने वाले स्वार क्षेत्र की विभिन्न टालों में खपाया जा रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने एक उच्चस्तरीय और गोपनीय रणनीति तैयार की। एसडीओ मनिंदर कौर के नेतृत्व में गठित इस विशेष दल में एसओजी प्रभारी कैलाश तिवारी, टांडा रेंज के अफसर रूप नारायण गौतम, पीपल पड़ाव रेंज के अफसर पूरन जोशी और गदगदिया रेंज के अफसर दिग्विजय जोशी सहित कई तेजतर्रार वन कर्मियों को शामिल किया गया।
हजूर 👉 यह पूरी कार्रवाई किसी फिल्मी एक्शन सीन से कम नहीं थी। शाम ढलते ही जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे स्वार क्षेत्र के एक संदिग्ध टाल पर इस संयुक्त टीम ने धावा बोला, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। तराई के संरक्षित वनों से अवैध रूप से काटकर लाई गई दर्जन भर से अधिक लकड़ी की सिल्लियां और लट्ठे टाल के भीतर छिपाकर रखे गए थे। तस्करों ने इतनी सफाई से लकड़ी को छिपाने की योजना बनाई थी कि आम तौर पर किसी की नजर वहां न पहुंचे, लेकिन वन विभाग की इस सर्जिकल स्ट्राइकनुमा छापेमारी ने तस्करों के पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया।
हजूर 👉 इस घटना ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय लकड़ी माफियाओं के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तराई के जंगलों से पेड़ों का अवैध कटान कर उन्हें सीमा पार उत्तर प्रदेश के टालों में पहुंचाना कोई नया खेल नहीं है, लेकिन इस बार जिस तरह से वन अधिकारियों ने प्रशासनिक सीमाओं की परवाह किए बिना उत्तर प्रदेश के स्वार क्षेत्र के भीतर घुसकर कार्रवाई को अंजाम दिया, उसने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किस प्रकार सुनियोजित तरीके से सीमावर्ती इलाकों को लकड़ी की तस्करी का सेफ जोन बना लिया गया है।
हजूर 👉 स्थानीय स्तर पर चर्चा इस बात की है कि यदि इसी तरह की सख्त और बिना किसी दबाव के लगातार कार्रवाई की जाए, तो जंगलों का सीना चीरने वाले इन तस्करों की कमर तोड़ी जा सकती है। हालांकि, यह भी देखने वाली बात होगी कि इस बड़ी जब्ती के बाद क्या केवल कागजी कार्रवाई तक मामला सीमित रहता है या फिर इस अवैध कारोबार के असली सरगनाओं और संरक्षकों तक भी कानून के हाथ पहुंचते हैं। फिलहाल, इस छापेमारी ने वन माफियाओं की नींद उड़ा दी है और महकमे में यह संदेश जरूर दे दिया है कि यदि अधिकारी ठान लें, तो सीमा की दीवारें भी तस्करों को नहीं बचा सकतीं।



