जंगल जासूस 👉सूत्रों के हवाले से
हजूर 👉 26 साल का उत्तराखंड और वन निगम के खेल👉 कालाढूंगी से रामनगर तक कागजों में तैरता भ्रष्टाचार?
हजूर 👉 जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था, तब सूबे की जनता को यह गहरी उम्मीद थी कि अलग राज्य मिलने के बाद यहाँ विकास के ऐसे पंख लगेंगे कि पूरा प्रदेश तरक्की की नई ऊंचाइयों को छू लेगा? लेकिन आज, जब उत्तराखंड अपनी स्थापना के छब्बीस साल पूरे करने की ओर बढ़ रहा है, तो जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आती है? राज्य के गठन से लेकर आज तक, वन निगम जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील महकमों में वित्तीय गड़बड़ियों, घोटालों और भ्रष्टाचार के खेल में जरा भी कमी नहीं आई है, बल्कि यह अराजकता का दौर और अधिक मजबूत होता गया है? वर्तमान में वन विकास निगम के गलियारों में इन दिनों ऐसी तगड़ी आग लगी हुई है कि वातानुकूलित कमरों में बैठे साहबों के पसीने छूट रहे हैं? कालाढूंगी और रामनगर से जुड़े ये दोनों ही मामले बिल्कुल अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों ने मिलकर महकमे के काले कारनामों की पूरी पोल खोलकर रख दी है?
हजूर 👉 कालाढूंगी क्षेत्र के डिपो संख्या दो में जो हैरतअंगेज खेल खेला गया, उसने सुरक्षा के तमाम खोखले दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं? रात के सन्नाटे में डिपो के सीने से खैर की बेशकीमती लकड़ी के पूरे बयालीस नग इस जादुई सफाई से गायब हो गए, मानो वे सैकड़ों किलो वजनी लकड़ी के विशालकाय लट्ठे न होकर हवा में उड़ने वाले कोई हल्के कबूतर रहे हों? अब जरा ठंडे दिमाग से इस पूरे कारनामे का गणित लगाइए कि खैर की इतनी भारी-भरकम लकड़ी को आखिर कोई रातोंरात कैसे गायब कर सकता है? इतने भारी लट्ठों को उठाने के लिए भारी वाहन चाहिए, लोडिंग के लिए क्रेन या हाइड्रा मशीन चाहिए और डिपो के मुख्य फाटक से बाहर निकलने के लिए खुला रास्ता चाहिए? लेकिन इस पूरे खेल में सबसे शर्मनाक सच तो यह है कि जिस वक्त डिपो के भीतर यह जादुई करिश्मा चल रहा था, उस वक्त सुरक्षा के नाम पर तैनात करने के लिए वहाँ कोई चौकीदार था ही नहीं? जब डिपो में चौकीदार ही नहीं रखा गया, तो फिर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे ही नजर आएगी? गड़बड़ियों का यह कोई पहला अजूबा नहीं है; इससे ठीक पहले इसी क्षेत्र के डिपो नंबर एक से सागौन जैसी अत्यंत महंगी लकड़ी के बीस नगों के रातोंरात फुर्र हो जाने की कहानी भी थाने की चौखट तक पहुंच चुकी है? एक तरफ सागौन पर डाका और दूसरी तरफ खैर का यूँ हवा में गायब होना, यह साफ गवाही दे रहा है कि वन निगम के ये डिपो अब लकड़ी के सुरक्षित भंडार नहीं रहे, बल्कि बिना चौकीदार के चल रही लापरवाही का अड्डा बन चुके हैं?
हजूर 👉 दूसरी तरफ, रामनगर डिपो से जुड़ा मामला एक बिल्कुल अलग और सनसनीखेज प्रशासनिक धांधली की कहानी कहता है? रामनगर निवासी जय प्रकाश जोशी की एक सजग शिकायत से इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ है? यदि जय प्रकाश जोशी इस गंभीर मामले को प्रमुखता से न उठाते और विभागीय गड़बड़ियों पर सवाल न खड़े करते, तो शायद रामनगर का यह सच कभी बाहर ही नहीं आ पाता और कागजी बाजीगरी का यह खेल यूँ ही पर्दे के पीछे चलता रहता? रामनगर के इस चर्चित मामले में चौंतीस दशमलव छह पांच घनमीटर जलौनी लकड़ी की लॉट संख्या दो सौ नब्बे का किस्सा बेहद दिलचस्प है? पच्चीस मार्च को दिन के उजाले में बाकायदा सरकारी मोहर के साथ निकासी की हरी झंडी दी जाती है, लकड़ी से भरा भारी वाहन डिपो का फाटक पार करके निकल जाता है, और फिर ठीक उसी रात बारह बजे किसी अदृश्य इशारे पर वह आदेश अचानक निरस्त कर दिया जाता है? फिर कुछ ही दिन बीतते ही अप्रैल के महीने में वही ठप्प पड़ा लॉट अचानक दोबारा जिंदा हो जाता है और फिर से निकासी की नई पर्चियां कट जाती हैं?
हजूर 👉 रामनगर के इसी चर्चित मामले में जब घपले की परतें खुलीं, तो क्षेत्रीय प्रभागीय लौगिंक प्रबंधक (डीएलएम) अशोक कुमार ने भी सिर्फ रामनगर के मामले को लेकर प्राथमिक स्तर पर शिकायतों में कुछ हद तक सत्यता को हवा दे दी है और अगले सप्ताह रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दी जाएगी? अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी क्या कार्यवाही करेंगे? रामनगर डिपो के भीतर भारी लट्ठों को लादने के लिए जिस हाइड्रा का बिना किसी लिखित अनुमति के इस्तेमाल हुआ, उसका हिसाब-किताब अब फाइलों में पूरी तरह उलझता जा रहा है? बिना किसी आधिकारिक आदेश के मशीन परिसर में कैसे आई और उसके किराए व ईंधन का भुगतान किस मद से हुआ, ये सवाल अब महकमे के लिए भारी चुनौती बन चुके हैं? जय प्रकाश जोशी की दमदार शिकायत और डीएलएम अशोक कुमार द्वारा रामनगर मामले में प्राथमिक पुष्टि के बाद तीन अफसरों की संयुक्त जांच समिति तो बना दी गई है, लेकिन देखना यह होगा कि कालाढूंगी में चौकीदार न रखने से लेकर लकड़ी गायब करने और रामनगर की फाइलों में खेल करने वाले असली जिम्मेदार चेहरों पर कब गाज गिरती है या फिर हमेशा की तरह ये फाइलें भी धूल फांकती रह जाती हैं?



