जंगल जासूस 👉
हजूर 👉 हल्द्वानी सीएफ नितेश मणि त्रिपाठी और तराई केंद्रीय DFO उमेश तिवारी के कड़े रुख से थर्राए तस्कर👉बिलासपुर में लीसा और चकलुवा में सागौन की बड़ी बरामदगी से मचा तहलका!
हजूर 👉 पश्चिमी वृत्त हल्द्वानी के वन संरक्षक नितेश मणि त्रिपाठी और तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर के प्रभागीय वनाधिकारी उमेश तिवारी के सख्त निर्देशों और सीधी मॉनिटरिंग के बाद वन तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे आक्रामक जंग छिड़ चुकी है। गुरुवार को बिलासपुर की शांत सुबह में अचानक गूंजे सरकारी हूटरों की भयावह गर्जना ने पूरे इलाके की खामोशी को पल भर में चीर कर रख दिया। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वन अधिकारियों का बड़ा संयुक्त काफिला जैसे ही लीसा स्टॉक स्थल के मुख्य गेट पर आकर रुका, वहां तैनात कर्मचारियों और कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। गाड़ियों से उतरते ही सशस्त्र वनकर्मियों की टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए पूरे भंडारण परिसर को चारों तरफ से घेर लिया और सभी मुख्य निकास द्वारों को तुरंत सील कर दिया। अधिकारियों के सख्त तेवरों, गाड़ियों की कतार और अचानक हुई इस अभूतपूर्व घेराबंदी से मौके पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जबकि आसपास के लोग दुकानों और छतों से केवल दूर खड़े होकर इस बड़ी विभागीय कार्रवाई के अंजाम को सहमे हुए देखने लगे।
हजूर 👉 परिसर के अंदर कदम रखते ही अलग-अलग प्रभागों से विशेष रूप से बुलाई गई वन विभाग की टीमों ने तेजतर्रार एसडीओ की सख्त अगुवाई में ताबड़तोड़ मोर्चा संभाल लिया। एक टीम ने मुख्य कार्यालय और दफ्तर पर धावा बोलकर वहां रखे आवक-जावक रजिस्टर, परिवहन परमिट, बिल्टी और अन्य तमाम गोपनीय कागजातों को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया, जबकि दूसरी टीम ने भंडारण क्षेत्र के भारी लोहे के दरवाजों को खोलकर स्टॉक की भौतिक जांच तेज कर दी। दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों और प्रबंधकों से जब अधिकारियों ने तीखे और सीधे सवाल पूछे, तो वे घबरा गए और कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए; कोई कागजात गुम होने का बहाना बनाने लगा तो कोई अपनी अज्ञानता जताने लगा। इस गहमागहमी के बीच जांच अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी जारी कर दी कि जब तक पूरे परिसर के एक-एक कोने की तलाशी पूरी नहीं हो जाती और स्टॉक का मिलान नहीं हो जाता, तब तक कोई भी व्यक्ति परिसर की सीमा से बाहर कदम नहीं रखेगा।
हजूर 👉 जांच अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ा और मुख्य गोदाम के अंधेरे कमरों में तेज सर्च लाइटों की रोशनी फेंकी गई, तो वहां करीने से चुनकर रखे गए टिनों का विशाल साम्राज्य देखकर खुद वन अधिकारियों के भी होश उड़ गए। अधिकारियों और वनकर्मियों की टीमों ने जब भौतिक सत्यापन और गिनती की प्रक्रिया शुरू की, तो एक के बाद एक लीसा से भरे टिनों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही चला गया और आखिरकार यह संख्या करीब बारह सौ टिन तक जा पहुंची। इतनी भारी और अकल्पनीय मात्रा में अवैध लीसा का जखीरा देखकर मौके पर मौजूद जांच दल की आंखें फटी की फटी रह गईं। सरकारी अभिलेखों में दर्ज आंकड़ों और मौके पर मौजूद इस विशालकाय स्टॉक के बीच दूर-दूर तक कोई तालमेल नहीं था, जिससे यह पूरी तरह साफ हो गया कि कागजों की हेराफेरी करके और अंतरराज्यीय सीमाओं को ठेंगा दिखाकर चोरी-छिपे लीसा की इस विशाल खेप को यहां ठिकाने लगाया गया था।
हजूर 👉 सुबह की इस धमाकेदार और विशाल कार्रवाई की गूंज अभी प्रशासनिक गलियारों में थमी भी नहीं थी कि शाम ढलते-ढलते कालाढूंगी के चकलुवा क्षेत्र में सायरन की तेज और भयावह आवाजों ने एक बार फिर पूरे इलाके में दहशत फैला दी। बिलासपुर में लीसा स्टॉक की गहन जांच पूरी करके लौटी संयुक्त टीम को जैसे ही एक और सटीक गुप्त सूचना मिली, वन विभाग और पुलिस की गाड़ियों का संयुक्त काफिला सीधे चकलुवा के हरिपुर गांव की ओर तूफानी रफ्तार से दौड़ पड़ा। शाम के धुंधलके में गांव की संकरी और कच्ची गलियों से गुजरती गाड़ियों की लाल-नीली बत्तियों और गूंजते सायरनों ने ग्रामीणों को अपने-अपने घरों के दरवाजों और छतों पर आने के लिए मजबूर कर दिया। गाड़ियां सीधे एक चिन्हित संदिग्ध तस्कर के खेत के पास जाकर रुकीं, जिसके तुरंत बाद सशस्त्र जवानों ने बिना एक सेकंड गंवाए पूरे खेत को चारों तरफ से पूरी तरह सील कर दिया ताकि कोई भी संदिग्ध अंधेरे का फायदा उठाकर भाग न सके।
हजूर 👉 सर्च लाइटों और तेज टॉर्चों की रोशनी में जब खेत की मेढ़ों और घनी झाड़ियों के बीच तलाशी अभियान आक्रामक रूप से चलाया गया, तो वहां का नजारा देखकर जांच टीम के चेहरे बेहद कठोर हो गए। घनी झाड़ियों के पीछे बेहद शातिराना अंदाज में छिपाकर रखे गए सागौन के करीब चार दर्जन भारी-भरकम, मोटे और अत्यधिक कीमती गिलटे बरामद किए गए। इतनी बड़ी संख्या में सागौन के मूल्यवान तनों का एक निजी खेत में पाया जाना इस बात का सीधा और पुख्ता सबूत था कि संरक्षित जंगलों से अवैध कटान करके इस बेशकीमती लकड़ी को यहां इकट्ठा किया गया था और इसे रात के अंधेरे में किसी बड़े तस्कर सिंडिकेट या खरीदार तक सप्लाई करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। मौके पर मौजूद वनकर्मियों ने बिना देरी किए लकड़ियों की नाप-जोख, गोलाई का आकलन और सीज़र लिस्ट तैयार करने की विधिक प्रक्रिया देर रात तक जारी रखी।
हजूर 👉 इस एक ही दिन में हुए ताबड़तोड़ दोहरे छापे ने अब जांच एजेंसियों और प्रशासनिक महकमे के सामने ढेरों अनुत्तरित और बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि जगह-जगह तैनात सुरक्षा चौकियों, वन चौकियों और सीमाई नाकों के होते हुए इतना विशाल बारह सौ टिन लीसा बिलासपुर के स्टॉक तक आखिर कैसे पहुंच गया, और किस संरक्षित जंगल का सीना चीरकर सागौन के चार दर्जन भारी गिलटों को काटकर खेत तक डंप किया गया था। क्या वन उपज के इस विशाल और काले कारोबार में निचले स्तर के कुछ कर्मचारियों की सीधी मिलीभगत या शह थी, या फिर तस्करों का कोई ऐसा गोपनीय और सुरक्षित गलियारा सक्रिय है जिसकी भनक तक प्रशासन को नहीं लग पा रही थी? दोनों ही प्रमुख ठिकानों पर मौके से कोई भी वैध परिवहन परमिट या विधिक दस्तावेज पेश न किया जाना यह साबित करता है कि यह पूरा खेल बिना किसी कानून के खौफ के एक सुसंगठित गिरोह द्वारा लंबे समय से चलाया जा रहा था।
हजूर 👉 हल्द्वानी सीएफ नितेश मणि त्रिपाठी के सख्त रुख और तराई केंद्रीय DFO उमेश तिवारी की सीधी देखरेख में अलग-अलग प्रभागों से बुलाई गई विशेष टीमों और तेजतर्रार एसडीओ की आक्रामक कार्रवाई ने अवैध वन कारोबारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं और उनके सिंडिकेट को हिलाकर रख दिया है। वन विभाग का शीर्ष नेतृत्व अब सिर्फ माल की जब्ती और पंचनामा भरने तक सीमित रहने के मूड में बिल्कुल नहीं है, बल्कि लीसा और सागौन की इस पूरी बैक-टू-बैक सप्लाई चेन की गहरी जन्मकुंडली खंगालने में जुट गया है। आने वाले दिनों में जब ट्रांसपोर्टरों, बिचौलियों, भंडारण स्वामियों और जंगल के कटानदारों के कड़ियों की कड़ाई से पड़ताल होगी, तो कई रसूखदार चेहरों के बेनकाब होने और इस संगठित तस्करी के पीछे छिपे बड़े मगरमच्छों को सलाखों के पीछे भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है।



