जंगल जासूस 👉
हजूर 👉तराई में लकड़ी माफिया का खूनी ‘सिंडिकेट’👉 टनकपुर से जसपुर तक तस्करों की ‘मौज’, वन विभाग का अपना जुर्माना ‘टैक्स’!
हजूर 👉गैंगस्टर स्टाइल में चल रही तस्करी, लग्जरी गाड़ियों का भौकाल👉 और वाहनों को ‘राजसात’ करने के नाम पर कछुआ चाल!
हजूर 👉 उत्तराखंड के तराई बेल्ट (टनकपुर से लेकर जसपुर तक) में लकड़ी माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि लगता है इन्होंने पूरे जंगल का ‘साफ-सफाई अभियान’ हाथ में ले रखा है! कभी सड़क किनारे लग्जरी गाड़ियां और पार्सल ट्रक लकड़ी से लदे मिलते हैं, तो कभी तराई पूर्वी की टीम बहेड़ी बॉर्डर से खैर बरामद कर लेती है। वहीं तराई पश्चिमी वन प्रभाग (रामनगर) की सुरक्षा टीम ने 16 सितंबर 2026 को जसपुर के भगवंतपुर रोड स्थित एक प्लॉट से शीशम के 28 नग अवैध प्रकाष्ठ कब्जे में लिए। अब तस्करों की किस्मत कहिए या जंगल का नसीब, लकड़ी तो हर दूसरे दिन बरामद हो जाती है👉लेकिन जनाब, असली यक्ष प्रश्न तो वही खड़ा है कि आखिर ये पेड़ कट किस ‘दिव्य’ जंगल से रहे हैं?
हजूर 👉 जसपुर वाली कार्रवाई को ही ले लीजिए। मुखबिर की सटीक ‘टिप’ पर वन क्षेत्राधिकारी श्री मथुरा सिंह मावड़ी की अगुवाई में वन दरोगा मगन लाल, वीरेंद्र सिंह परिहार, सुखदेव सिंह और चालक श्याम सुंदर की टीम ने मुस्तैदी दिखाई, मौके पर पहुंचे, 28 गिल्टे जब्त किए और एफआईआर दर्ज कर ली। तस्करों की बंदूक और दांव-पेच के आगे अपनी जान जोखिम में डालकर गश्त करने वाले इन जमीनी वनकर्मियों की हिम्मत और सजगता को तो हमारा शत-शत सलाम है! लेकिन साहिब, कहानी इसके आगे जाकर अटक जाती है। जब भी कोई बड़ी कार्रवाई होती है, तो साहब लोग बरामदगी का वजन और जुर्माने का आंकड़ा ऐसे दिखाते हैं मानो कोई मेगा डिस्काउंट ऑफर चल रहा हो! पर सवाल तो वही है👉जिस जंगल में आरी चली, उस कटान स्थल का नाम किसी फाइल में दर्ज क्यों नहीं होता? जब तक पेड़ काटने वाले ‘कुल्हाड़ी वीरों’ और गाड़ियों का काफिला भेजने वाले ‘सफेदपोश आकाओं’ पर हाथ नहीं डाला जाएगा, तब तक केवल कटी लकड़ी गिनने से माफिया का क्या बिगड़ेगा?
हजूर 👉 अब आते हैं सबसे मजेदार और तीखे मोड़ पर👉प्रशासनिक ढिलाई! तस्कर अपनी लग्जरी गाड़ियों, ट्रकों और पिकअप में लकड़ी लादकर निकलते हैं। विभाग उन्हें पकड़ता है, जुर्माना ठोकता है, और तस्कर मुस्कुराते हुए ‘टैक्स’ भरकर अपनी गाड़ी छुड़ाकर ले जाते हैं! फिर अगले हफ्ते वही गाड़ी नई लकड़ी के साथ सेवा में हाजिर! आखिर इन वाहनों को तुरंत सीज करके ‘राजसात’ (सरकारी संपत्ति घोषित) करने में कौन सा मुहूर्त आड़े आ रहा है? जब तक इन गाड़ियों को सीज करके नीलाम नहीं किया जाएगा और तस्करों पर सख्त गैंगस्टर एक्ट लगाकर उनकी जेब पर वार नहीं होगा, तब तक तो यह खेल ऐसे ही ‘मसालेदार’ अंदाज में चलता रहेगा।
हजूर 👉 यद्यपि प्रभागीय वनाधिकारी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग द्वारा रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने और तस्करों पर कड़ी कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन हुजूर, कागजी गश्त और सिर्फ आदेशों के चाबुक से तस्करों की दीमक रुकने वाली नहीं है। तराई का यह इलाका अब छोटी-मोटी चोरी का अड्डा नहीं, बल्कि एक हाई-टेक सिंडिकेट बन चुका है जो सुरक्षा चक्र को अंगूठा दिखाकर निकल जाता है। जब तक हर गश्त पारदर्शी नहीं होगी और तस्करों की गाड़ियों को राजसात करने का हंटर नहीं चलेगा, तब तक जंगल ऐसे ही गायब होते रहेंगे।
सीधी बात 👉 जमीनी कर्मचारियों के पसीने और मेहनत को सलाम है, लेकिन सिर्फ कटी लकड़ी तोलने और जुर्माने की पर्ची काटने से जंगल नहीं बचेंगे! वन विभाग को साफ-साफ बताना ही होगा कि टनकपुर से जसपुर तक फैले इस ‘सिंडिकेट’ का असली ‘बॉस’ कौन है, इन 28 शीशम के पेड़ों की कटी हुई ‘जड़’ किस बीट में है, और तस्करों की गाड़ियों को नीलाम करके इस माफिया का नेटवर्क आखिर कब ध्वस्त किया जाएगा?



