हजूर 👉जंगल में कटे पेड़, सड़क तक पहुंचीं 40 सिल्लियां! लाखामंडल में वन विभाग की चौकसी पर भाजपा नेत्री के तीखे सवाल?

 

 

 

 

 

जंगल जासूस👉

हजूर 👉जंगल में कटे पेड़, सड़क तक पहुंचीं 40 सिल्लियां! लाखामंडल में वन विभाग की चौकसी पर भाजपा नेत्री के तीखे सवाल?

हजूर 👉 देहरादून के चकराता वन प्रभाग के लाखामंडल में 40 लकड़ी की सिल्लियां पकड़े जाने के बाद वन महकमे की निगरानी व्यवस्था पर सवालों की बौछार शुरू हो गई है। मामला सिर्फ लकड़ी पकड़े जाने का नहीं, बल्कि उस पूरे रास्ते का है, जहां जंगल से पेड़ कटने, सिल्लियां तैयार होने और गाड़ी भरकर लकड़ी पहुंचने तक की कहानी सामने आनी बाकी है। प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा की विशेष आमंत्रित कार्यकारिणी सदस्य बचना शर्मा ने वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय रेंजर विनोद चौहान पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं कि जब पेड़ कट रहे थे, तब विभाग कहां था, जब सिल्लियां बनाई जा रही थीं, तब निगरानी कौन कर रहा था और जब लकड़ी सड़क तक पहुंच गई, तब वन महकमे की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी।

हजूर 👉 भाजपा नेत्री बचना शर्मा ने रेंजर विनोद चौहान की कार्यशैली पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि गरीब ग्रामीणों के घरों में रखी पुरानी लकड़ी के मामले में विभाग सख्ती दिखाता है, लेकिन ताजा कटान से जुड़ी बताई जा रही 40 सिल्लियों का मामला कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि दादा-परदादा के समय से रखी पुरानी माफी की लकड़ी को लेकर ग्रामीणों को परेशान किया जाता है, जबकि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी आखिर कहां से आई और किस रास्ते से पहुंची, इसकी जांच होनी चाहिए। हजूर, सवाल सीधा है कि अगर जंगल की रखवाली करने वाला महकमा ही कटान से ढुलाई तक की कड़ियों का जवाब नहीं दे पाया, तो निगरानी व्यवस्था की असलियत सामने लाने के लिए जांच किस स्तर पर होगी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही हो सकेगी।

हजूर 👉 पहाड़ में लकड़ी के पुराने मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि पीढ़ियों की विरासत भी हैं। बचना शर्मा ने कहा कि ग्रामीणों को माफी की लकड़ी मिलने की व्यवस्था सीमित है और पुराने मकानों में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी को लेकर गरीब परिवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों पर कार्रवाई करने में तेजी दिखाई जाती है, लेकिन 40 सिल्लियों के इस प्रकरण में कटान के स्रोत और परिवहन की पूरी कड़ी सामने आनी चाहिए। अब जांच में यह पता लगाना जरूरी है कि लकड़ी किस स्थान से काटी गई, सिल्लियां कहां तैयार हुईं, उन्हें किस वाहन से लाया गया और संबंधित क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों की गश्त का रिकॉर्ड क्या कहता है। अगर कहीं लापरवाही या मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।

हजूर 👉 बचना शर्मा ने वन मंत्री सुबोध उनियाल और डीएफओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ग्रामीणों के कथित शोषण का मामला नहीं सुलझा तो आंदोलन किया जाएगा और वह स्वयं वन मंत्री व उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगी। अब लाखामंडल में 40 सिल्लियों की बरामदगी के बाद वन विभाग के सामने सवालों की पूरी फेहरिस्त है। जंगल में पेड़ किसने काटे, लकड़ी सिल्लियों में किसने बदली, गाड़ी भरकर माल कैसे पहुंचा और निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। हजूर, लकड़ी तो पकड़ में आ गई, अब देखना यह है कि जांच इन 40 सिल्लियों पर रुकती है या जंगल से सड़क तक फैली पूरी कड़ी की पड़ताल भी होती है।

 

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