हजूर 👉 तमंचा गरजा, पाटल चला और जंगल में मच गया हड़कंप👉 वनकर्मी ने छलांग लगाकर बचाई जान, सायरन सुनते ही खैर छोड़ भागे कथित तस्कर

 

 

 

 

 

जंगल जासूस 👉

हजूर 👉 तमंचा गरजा, पाटल चला और जंगल में मच गया हड़कंप👉 वनकर्मी ने छलांग लगाकर बचाई जान, सायरन सुनते ही खैर छोड़ भागे कथित तस्कर

 हजूर👉तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर की बरहैनी रेंज में दोपहर तीन बजे जंगल की खामोशी अचानक तमंचे की आवाज से चकनाचूर हो गई। दक्षिणी बरहैनी बीट के प्लॉट नंबर 09 से 10 की तरफ वन आरक्षी एवं बीट अधिकारी पंकज कुमार मौर्य टीम के साथ गश्त कर रहे थे। तभी सामने खैर के भारी लट्ठों से लदी मोटरसाइकिल दिखाई दी। वनकर्मियों ने रोकने की कोशिश क्या की, जंगल की गश्त देखते-देखते जान बचाने की जंग में बदल गई।

 हजूर👉 विभागीय आरोपों के मुताबिक मोटरसाइकिल पर करण सिंह और प्रदीप सिंह उर्फ सोनू नटिया सवार थे। रोकने का इशारा होते ही कथित तौर पर सोनू नटिया ने .315 बोर का तमंचा निकाला और वनकर्मियों की तरफ फायर कर दिया। धांय! गोली चली और पंकज मौर्य ने एक पल गंवाए बिना जमीन पर छलांग लगा दी। कहते हैं जान है तो जहान है, लेकिन उस वक्त जंगल में यह कहावत नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी थी।

हजूर👉गोली का धुआं छंटा भी नहीं था कि कथित तौर पर पाटल निकल आया। आरोप है कि करण सिंह ने लोहे का धारदार पाटल घुमाकर वनकर्मी के सिर पर वार करने की कोशिश की। पंकज मौर्य ने आखिरी क्षण में हाथ आगे कर वार रोक लिया, लेकिन अंगुली कट गई। यानी सामने एक तरफ सरकारी ड्यूटी, दूसरी तरफ तमंचा और पाटल👉और बीच में वनकर्मी अपनी जान बचाते हुए भी जंगल की संपत्ति बचाने में जुटे रहे।

हजूर👉फिर जंगल में गूंजा सरकारी वाहन का सायरन। वाहन संख्या UK07GA5356 से बैकअप टीम के पहुंचने की आहट मिली तो कथित हमलावरों के पैर उखड़ गए। जिस खैर के माल के लिए इतनी बहादुरी दिखाई जा रही थी, वही खैर के तीन भारी नग मौके पर छोड़कर भागने की नौबत आ गई। आरोप है कि जाते-जाते धमकियां भी दी गईं। मौके से पाटल और .315 बोर का चला हुआ खोखा बरामद होने की बात वन विभाग ने कही है।

हजूर 👉 इसके बाद बरहैनी रेंज के डिप्टी रेंजर गोपाल कृष्ण कपिल ने मोर्चा संभाला। पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों की तलाश शुरू हुई और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। विभागीय जानकारी के अनुसार दोनों नाम पहले से FIR संख्या 92/2025 में भी सामने आ चुके हैं। अब ताजा मामले में पुलिस जांच यह तय करेगी कि जंगल में आखिर तमंचा किसने चलाया, पाटल किसने घुमाया और खैर के लट्ठे जंगल से किस रास्ते निकल रहे थे।

 हजूर👉असली कहानी तो यहीं से शुरू होती है। सवाल सिर्फ तीन खैर के नगों का नहीं है👉सवाल यह है कि अगर जंगल की रखवाली करने वाले कर्मचारी के सामने दिनदहाड़े तमंचा निकल सकता है, तो रात के अंधेरे में जंगल का क्या हाल होता होगा? खैर के लट्ठे, तमंचा, पाटल और धमकी 👉जंगल की यह तस्वीर किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि वन सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ा वह सवाल है जिसका जवाब अब सिर्फ कागजों में नहीं, कार्रवाई में चाहिए।

Advertisement
Advertisement
❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.