हजूर 👉जंगल की कहानी सुनाने निकले हैं साहब 👉मगर जंगल के आसपास रहने वालों के लिए दरवाजा कितना खुला है?

 

जंगल जासूस 👉

हजूर 👉कॉर्बेट में साहित्य की दहाड़ या रिसॉर्ट की घंटी?

हजूर 👉जंगल की कहानी सुनाने निकले हैं साहब 👉मगर जंगल के आसपास रहने वालों के लिए दरवाजा कितना खुला है?

हजूर 👉 कॉर्बेट को जिसने सच में महसूस किया है, वह जानता है कि जंगल सिर्फ पेड़ों का झुंड नहीं होता। सुबह की पहली चिड़िया, सूखी पत्तियों पर चुपचाप गुजरता हिरन, नदी किनारे पड़े बाघ के पदचिह्न और दूर से आती हाथियों की आवाज👉यही तो कॉर्बेट की असली किताब है। अब इसी जंगल की पृष्ठभूमि में 6 से 8 अक्टूबर तक साहित्य का महोत्सव सजने जा रहा है। लेखक आएंगे, पर्यावरण पर चर्चा होगी, वन्यजीवों की बातें होंगी, संस्कृति और प्रकृति पर संवाद होगा। सुनकर किसी भी वन्यजीव प्रेमी का मन खुश हो जाए। लेकिन फिर वेबसाइट की एक पंक्ति आंखों के सामने आकर ठहर जाती है👉“प्रवेश केवल हमारे आतिथ्य साझेदारों के माध्यम से।” बस हजूर, यहीं से जंगल की कहानी में रिसॉर्ट का अध्याय खुल जाता है! मन पूछ बैठता है👉कॉर्बेट की कहानी सुनने के लिए जंगल का प्रेम काफी है या अब रिसॉर्ट में ठहरने की शर्त भी जरूरी है?

हजूर 👉 साहित्य तो वह चीज है जो कभी पेड़ की छांव में बैठकर सुनाया गया, कभी गांव की चौपाल में, कभी विद्यालय के बरामदे में और कभी नदी किनारे। मगर कॉर्बेट ने शायद साहित्य को भी पर्यटन का नया चश्मा पहना दिया है👉चौपाल की जगह रिसॉर्ट, चटाई की जगह कमरा और खुली चर्चा की जगह आवासीय पैकेज! आयोजन के आतिथ्य साझेदारों के रूप में द गोल्डन टस्क, द रिवरव्यू रिट्रीट और आहाना रिसॉर्ट एंड स्पा के नाम सामने आते हैं। निजी रिसॉर्ट में ठहरना किसी की पसंद हो सकती है और ऐसा आयोजन आवासीय स्वरूप में होना अपने आप में कोई गलत बात नहीं। मगर एक वन्यजीव प्रेमी का सवाल फिर भी बचा रहता है👉अगर रामनगर का कोई विद्यार्थी केवल एक लेखक को सुनना चाहता है तो क्या वह आ सकता है? अगर कालाढूंगी का कोई युवा पर्यावरण पर चर्चा सुनना चाहता है तो क्या उसे तीन रातों का ठहराव लेना होगा? अगर कोई स्थानीय लेखक कॉर्बेट की अपनी कहानी सुनाना चाहता है तो उसके लिए रास्ता कहां है? यही वह जगह है जहां साहित्य की चमक के बीच जनसुलभता का सवाल दिखाई देता है।

हजूर 👉 और यह सवाल सिर्फ साहित्य प्रेमियों का नहीं, कॉर्बेट से रोजी-रोटी जोड़कर बैठे स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का भी हो सकता है। आखिर तीन आतिथ्य साझेदार ही क्यों? उनका चयन किन आधारों पर हुआ? सुविधाएं, क्षमता, स्थान, आयोजन की जरूरत या कोई दूसरी प्रक्रिया? क्या अन्य होटल, छोटे रिसॉर्ट और स्थानीय आवास संचालकों के लिए भी कोई अवसर था? क्या साझेदारी के नियम सार्वजनिक हैं? इन सवालों का मतलब किसी पर उंगली उठाना नहीं है। बल्कि उल्टा👉अगर सब कुछ नियम और पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ है तो कागज दिखाइए और सवाल खत्म कीजिए। जंगल में सबसे खूबसूरत चीज पारदर्शिता ही होती है👉पेड़ों के बीच कुछ छिपता नहीं, तो फिर आयोजन की साझेदारी में भी कुछ छिपाने की जरूरत क्यों हो?

हजूर 👉 मुझे सबसे ज्यादा चिंता उस स्थानीय बच्चे की होती है जो कॉर्बेट को किसी महंगे कमरे की खिड़की से नहीं, अपने गांव की पगडंडी से जानता है। जिसने शायद बाघ को किताब में नहीं, जंगल की सीमा पर देखा है। जिसने हाथियों का झुंड खेत की तरफ आते देखा है। जिसने पक्षियों की आवाज पहचानना किसी प्रशिक्षण शिविर में नहीं, अपने बुजुर्गों से सीखा है। ऐसे बच्चों, स्थानीय विद्यार्थियों, युवाओं, लेखकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए अगर कोई खुला रास्ता बनाया जाए तो यही महोत्सव सचमुच कॉर्बेट की मिट्टी से जुड़ जाएगा। स्थानीय पास है? डे-पास है? एक-दिवसीय प्रवेश है? विद्यार्थियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था है? अगर है तो बताइए👉खुशी होगी। क्योंकि जंगल की कहानी सबसे पहले उसी को सुननी चाहिए जो जंगल के साथ जीता है।

हजूर 👉 आखिर कॉर्बेट को हम किस रूप में देखना चाहते हैं👉सिर्फ घूमने की जगह, आलीशान ठहराव की जगह, या जंगल को समझने की जगह? साहित्य महोत्सव हो, जरूर हो👉बड़े लेखक आएं, जरूर आएं👉पर्यावरण पर बहस हो, खूब हो। लेकिन उस बहस की खिड़की इतनी जरूर खुली रहे कि बाहर खड़ा स्थानीय युवा भी भीतर की आवाज सुन सके। वेबसाइट पर “प्रवेश केवल हमारे आतिथ्य साझेदारों के माध्यम से” जैसी व्यवस्था लिखी है तो स्वाभाविक है कि सवाल उठेंगे। जवाब भी बहुत मुश्किल नहीं हैं👉क्या बिना रिसॉर्ट में ठहरे साहित्यिक सत्र में प्रवेश संभव है? स्थानीय लोगों के लिए क्या व्यवस्था है? और आतिथ्य साझेदारों के चयन की प्रक्रिया क्या रही? इन सवालों के जवाब साफ मिल जाएं तो कॉर्बेट की यह साहित्यिक शाम और भी खूबसूरत लगेगी। क्योंकि जंगल की असली खूबसूरती यही है कि उसकी हवा किसी की जेब देखकर नहीं चलती 👉फिर जंगल की कहानी सुनने का रास्ता भी जेब देखकर क्यों खुले?

Advertisement
Advertisement
❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.