हजूर 👉सागौन कटान कांड👉रामपुर के लकड़ी तस्करों की अकड़ ढीली, हाईकोर्ट से झटका मिलते ही रामनगर कोर्ट में सरेंडर, पहुंचे सलाखों के पीछे!

👉जंगल जासूस 👉

हजूर 👉सागौन कटान कांड:👉रामपुर के लकड़ी तस्करों की अकड़ ढीली, हाईकोर्ट से झटका मिलते ही रामनगर कोर्ट में सरेंडर, पहुंचे सलाखों के पीछे!

हजूर 👉कार्बेट टाइगर रिजर्व के बिजरानी वन क्षेत्र में हुए सागौन कटान कांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से जुड़े लकड़ी तस्करों का आतंक उत्तराखंड के सीमावर्ती जंगलों में किस कदर गहराया हुआ है। रामनगर और बिजरानी के घने जंगलों को निशाना बनाने वाले रामपुर के ये शातिर अपराधी लंबे समय से सीमा पार कर बेशकीमती इमारती लकड़ियों की कटान और तस्करी के धंधे को अंजाम दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 309 से सटे फूलताल ब्लॉक में रातों-रात सागौन के विशाल वृक्षों पर कुल्हाड़ियां चलाकर लकड़ी साफ कर देना इनके बेखौफ इरादों की साफ गवाही देता है।

हजूर 👉मामले की जांच में जब परतें खुलीं तो रामपुर निवासी सात तस्करों का एक पूरा संगठित गिरोह बेनकाब हुआ, जो सुनियोजित तरीके से जंगलों का सीना चीरकर तिजोरियां भरने में लगा था। जांच के दौरान एक आरोपी को शुरुआत में ही जेल भेज दिया गया था, लेकिन बाकी सदस्य कानूनी शिकंजे से बचने के लिए चूहे-बिल्ली का खेल खेलते रहे। वन विभाग के अधिकारियों द्वारा बार-बार जारी किए गए नोटिसों को ठेंगा दिखाना और महीनों फरारी काटना इनके दुस्साहस को दर्शाता है। आखिरकार वन विभाग ने सख्त रवैया अपनाते हुए अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी करवाया, जिसके बाद एक और आरोपी को सलाखों के पीछे धकेला गया।

हजूर 👉अपनी तयशुदा गिरफ्तारी से खौफजदा होकर गिरोह के मुख्य सरगना उमेर खान और उसके साथियों ने जेल जाने से बचने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई। हालांकि, कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन की मजबूत पैरवी, कोर्ट सेल के पुख्ता समन्वय और अदालत में पेश किए गए अकाट्य दस्तावेजों के आगे तस्करों की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई। उच्च न्यायालय ने पर्यावरणीय अपराध की संवेदनशीलता को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिससे तस्करों के पास भागने के सारे रास्ते बंद हो गए।

हजूर 👉 हाईकोर्ट से झटका मिलने और चारों तरफ से घिर जाने के बाद आखिरकार बचे हुए तीन आरोपियों समीर, सलमान और उमेर खान का सारा गुरूर चकनाचूर हो गया और उन्हें रामनगर न्यायालय के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा। अदालत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। हालांकि इस कार्रवाई से महकमे ने राहत की सांस ली है, लेकिन रामपुर क्षेत्र से फल-फूल रहे इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना वन महकमे और पुलिस प्रशासन के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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