जंगल जासूस 👉
हजूर 👉 फूलबाग में खैर की ‘कटाई👉 तस्कर माल ले उड़े, पीछे रह गए ठूंठ और मुकदमे की कहानी!
हजूर 👉 रुद्रपुर रेंज के फूलबाग बिट में इन दिनों जंगल की कहानी कुछ ऐसी है कि सुनकर खैर के पेड़ भी सोचें👉“भाई, हमारी बारी कब आ गई?” मस्जिद के पीछे जंगल में करीब तीन दिन पहले तस्करों ने खैर के लगभग तीन पेड़ों पर आरी चला दी। पेड़ गिरे, लकड़ी निकली और माल लेकर उस्ताद ऐसे गायब हुए जैसे जंगल में आए ही न हों। न कोई टिकट, न कोई टोल, न कोई विदाई समारोह! पीछे रह गए तीन ठूंठ और आगे निकल गई खैर की लकड़ी। अब सवाल बस इतना है कि तस्करों की आरी तेज थी या रेंजर साहब कि टीम की नजर थोड़ी सुस्त?
हजूर 👉 खैर कटने की खबर बाहर आई तो रुद्रपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मण बिष्ट ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हो गया है और आरोपियों की तलाश जारी है। बयान ऐसा कि लगा👉बस अब तस्कर दरवाजे पर दस्तक देने ही वाले हैं! लेकिन तभी कहानी में दूसरा पात्र दाखिल हुआ👉विभागीय सूत्र। सूत्रों की मानें तो मुकदमा अभी दर्ज ही नहीं हुआ। अब हजूर, मामला पेड़ से निकलकर सीधे कागज पर आ गया। एक तरफ साहब कहते हैं “मुकदमा हो गया”, दूसरी तरफ सूत्र कहते हैं “अभी तो हुआ ही नहीं।” आखिर सच किसकी जेब में बैठा है?
हजूर 👉 यहां कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा यही है। अगर मुकदमा दर्ज है तो उसका नंबर होगा, तारीख होगी, रिपोर्ट होगी और फाइल में कहीं न कहीं उसकी शक्ल भी होगी। अगर नहीं है तो फिर सवाल और भी चटपटा है👉मुकदमा जंगल में दर्ज हुआ, दफ्तर में दर्ज हुआ या सिर्फ बयान में दर्ज हुआ? क्योंकि तीन खैर के पेड़ तो अपनी जगह से चले गए, मगर मुकदमा आखिर किस जगह खड़ा है👉इसका पता अभी तक नहीं चल पाया!
हजूर 👉 उधर तस्करों ने अपना काम बड़े आराम से निपटाया और इधर अब हिसाब-किताब का दौर शुरू है। कितने पेड़ कटे? लकड़ी कितनी निकली? मौके पर कौन पहुंचा? ठूंठ की नाप कितनी हुई? और सबसे बड़ा सवाल👉माल गया किस रास्ते से? अगर इन सवालों के जवाब फाइल में हैं तो कहानी छोटी है, लेकिन अगर जवाब ढूंढने के लिए दूसरी फाइल खोलनी पड़े तो फूलबाग का यह ‘खैर अध्याय’ थोड़ा लंबा चल सकता है।
हजूर 👉 फिलहाल फूलबाग बिट में नजारा बड़ा दिलचस्प है👉पेड जमीन पर, लकड़ी बाजार की राह पर, तस्कर पता नहीं कहां और मुकदमा सवालों के कटघरे में! अब देखना यह है कि पहले कौन मिलता है👉खैर की लकड़ी, खैर काटने वाले या वह मुकदमा जिसकी मौजूदगी को लेकर ही दो अलग-अलग कहानियां घूम रही हैं। तब तक जंगल जासूस की नजर फूलबाग पर है👉 क्योंकि हजूर, यहां खैर के पेड़ कटे हैं और कहानी अभी बाकी है!



